
साहित्यिक गतिविधियां
संगम नगरी की साहित्यिक विरासत
गुफ़्तगू संस्था की प्रमुख गतिविधियाँ साहित्य, संस्कृति और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को केंद्र में रखकर संचालित होती हैं। संस्था नियमित रूप से कवि सम्मेलन, मुशायरे, विचार गोष्ठियाँ और साहित्यिक चर्चाएँ आयोजित करती है, जहाँ स्थापित और नवोदित रचनाकार एक साथ मंच साझा करते हैं।
संस्था त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशन और पुस्तकों के प्रकाशन के माध्यम से लेखकों को अपनी रचनाएँ प्रकाशित करने का अवसर देती है। इसके साथ ही साहित्यिक सम्मान एवं पुरस्कार समारोह आयोजित कर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों और कलाकारों को सम्मानित किया जाता है।
गुफ़्तगू संस्था द्वारा साहित्यिक महोत्सव, जैसे प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल, का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें देशभर के लेखक, कवि और विचारक भाग लेते हैं। साथ ही संस्था युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए कार्यशालाएँ, पाठन-सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करती है, जिससे साहित्य और समाज के बीच संवाद और भी सशक्त बनता है।
प्रयागराज लिटरेरी फेस्टिवल
प्रयागराज की पावन धरा हमेशा से साहित्य, संस्कृति और वैचारिक विमर्श का केंद्र रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 'गुफ़्तगू' संस्था प्रतिवर्ष विभिन्न साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से शब्दों और संवेदनाओं का एक साझा मंच तैयार करती है। हमारे इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य न केवल स्थापित साहित्यकारों की रचनाधर्मिता को सम्मान देना है, बल्कि उभरती हुई नई प्रतिभाओं को एक सशक्त पहचान दिलाना भी है। संगम नगरी के सांस्कृतिक ताने-बाने में रचे-बसे ये कार्यक्रम कविता, कहानी और विमर्श के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संवाद स्थापित करने का प्रयास करते हैं


गुफ़्तगू के २४ साल
गुफ़्तगू संस्था के 24 वर्ष साहित्य, संवाद और सृजन की एक सतत यात्रा का प्रतीक हैं। इन वर्षों में संस्था ने न केवल त्रैमासिक पत्रिका और प्रकाशनों के माध्यम से साहित्यिक चेतना को समृद्ध किया, बल्कि विविध आयोजनों, कवि सम्मेलनों और विचार गोष्ठियों के जरिए साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच भी प्रदान किया। यह यात्रा निरंतर नए विचारों, नवोदित रचनाकारों और स्थापित साहित्यकारों के संगम से सजी रही है।
इम्तियाज अहमद ग़ाज़ी की पुस्तक “21वीं सदी के इलाहाबादी” पुस्तक आधुनिक समय में इलाहाबाद (प्रयागराज) की साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा के निर्वाहको को नई दृष्टि से प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक उन रचनाकारों, चिंतकों और सृजनधर्मियों का परिचय कराती है, जिन्होंने 21वीं सदी में इस शहर की पहचान को आगे बढ़ाया है। परंपरा और आधुनिकता के संगम को दर्शाती यह कृति इलाहाबाद की साहित्यिक विरासत को संजोती है,।
२१ वीं सदी के इलाहबादी




गुफ़्तगू के वार्षिक कार्यक्रम
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साहित्य समारोह- 2016
गुफ्तगू ने पिछले 13 सालों में शानदार कार्यक्रम और पत्रिका का संचालन करके अच्छी मिसाल पेश किया है, इलाहाबाद जैसे शहर में ऐसे आयोजन और प्रकाशन करना काफी पुरानी परंपरा रही है। इस काम के लिए टीम गुफ्तगू बधाई की पात्र है। यह बात हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उमेश नारायण शर्मा ने कही। साहित्यिक संस्था गुफ्तगू की ओर ‘साहित्य समारोह-2016’ का आयोजन रविवार की शाम किया गया, वे बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष लोगों को संबोधित कर रहे थे।
साहित्य समारोह- 2018
गुफ्तगू साहित्य समारोह 2017 के बहाने रचना, रचनाकार और रचनाधर्मिता पर विस्तार से मंथन किया गया। 16 अप्रैल को हिन्दुस्तानी एकेडमी में दूर दराज से आए बड़ी तादाद में साहित्यकारों का जुटान हुआ। कहा गया कि साहित्य और साहित्यकार दोनों को नए सिरे से समझने की जरूरत है। पुराने को नए के साथ जोड़ना भी जरूरी है। इस क्षेत्र में चुनौतियां भी कई हैं, इनको समझना और इनसे जूझना भी होगा। शुरू में कार्यक्रम की भूमिका इम्तियाज अहमद गाजी ने पेश किया।
साहित्य समारोह- 2017
आज लोग साहित्य से दूर भाग रहे हैं। पठन-पाठन लगातार कम होता जा रहा है। अधिकतर साहित्यिकार अपनी रचनाओं से लोगों को आकर्षित करने में नाकामयाब हैं। ऐसे विपरीत हालात में पिछले 15 वर्षों से गुफ्तगू का साहित्यिक सफ़र प्रासंगिकता के साथ जारी है, यह बेहद सराहनीय है। आज के माहौल यह कार्य बेहद ख़ास हो जाता है। यह बात वरिष्ठ साहित्यकार नीलकांत ने ‘गुफ्तगू’ की ओर से 29 अप्रैल को इलाहाबाद स्थित हिन्दुस्तानी एकेडेमी में आयोजित ‘गुफ्तगू साहित्य समारोह-2018’ के दौरान कही।
